बुजुर्गों के दोस्त बनने की ट्रेनिंग ले रहे युवा

केरल के कोच्चि और एरूर में युवा बुजुर्गों का दोस्त बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। इसके लिए मित्रकुलम संस्था ने ‘कम्पैशनेट कम्पेनियन’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत युवाओं को बुजुर्गों से बातचीत करने का तरीका, उनकी भावनाएं समझने, उनकी परेशानियों को दूर करने के तरीके और फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी जा रही है। अब तक इसके 3 बैच पूरे हो चुके हैं और चौथे बैच की तैयारी चल रही है। इस कार्यक्रम को कोट्टायम की एमजी यूनिवर्सिटी ने मान्यता दी है और इसके एसएच कॉलेज में यह कोर्स इसी सत्र से शुरू होने जा रहा है। इसमें 30 घंटे की थ्योरी और 30 घंटे का प्रैक्टिकल होगा। यह किसी विश्व विद्यालय द्वारा शुरू किया गया इस तरह का भारत का पहला कोर्स होगा। बुजुर्गों के ये युवा दोस्त उनसे बातचीत करते हैं और – इस दौरान उन्हें मोबाइल, इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग, मनी मैनेजमेंट, इमरजेंसी हेल्प लेने के तरीके, – पुलिस स्टेशन, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाओं से संपर्क करने की जानकारी देकर आत्मनिर्भर बनाते हैं।
किसने किया डिजाइन
यह कार्यक्रम वायनाड-दुबई में क्लिनिक चलाने वाले मनोवैज्ञानिक डॉ. लेसिन जॉर्ज ने डिजाइन किया है। वे इस कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक भी हैं। वे कहते हैं- बुजुगों को लगता है कि वे समाज के लिए गैर जरूरी हो गए हैं, लेकिन उन्हें यह समझाना होगा कि उन्हें सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। कक्कनाड के रहने वाले 60 वर्षीय रामचंद्रन बताते हैं कि पहले वे अपने माता-पिता को समझ नहीं पाते थे, लेकिन इस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद वे उन्हें धैर्य से सुनने लगे हैं।
बुजुर्गों की सेवा अब कॅरिअर भी बन रहा

बुजुर्गों की सेवा कॅरिअर की दृष्टि से एक उभरता हुआ क्षेत्र है, लेकिन अब तक इसके लिए भारत में कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं थी । ये कोर्स इस क्षेत्र में जाने वाले युवाओं के लिए मददगार हो सकता है। वे नर्स या केयरटेकर से अलग और बेहतर हो सकते हैं। जैसे पहले बैच की ट्रेंड सिंधु केरल के इडुक्की जिले में बुजुर्गों की सेवा कर रही हैं।
ट्रेनिंग में सुनने पर फोकस
इस कार्यक्रम में युवाओं को सबसे पहले सुनने की सीख दी जाती है।
• बुजुर्गों के पोषण और खान-पान की भी ट्रेनिंग दी जाती है।
• बुजुर्गों की समस्या का समाधान उनके तरीके से ढूंढ़ने पर फोकस।
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